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Saturday, June 12, 2010

हमारी पीढ़ी में जगे पढने कि ललक

वरिष्ठ कथाकार मालचंद तिवारी का एक एसएमएस मिला है. उनका कहना है कि वर्ष २०१० हिंदी साहित्य के तीन दिग्गज कवियों का जन्म शताब्दी वर्ष है. ये तीन कवि हैं - शमशेर, अज्ञेय और नागार्जुन.
भारतीय साहित्य में इनका नाम सम्मान से लिया जाता है. तिवारीजी का सवाल है कि क्या हमें कुछ करना नहीं चाहिए ?
यक़ीनन, यह जरुरी है. आज कि पीढ़ी के लिए तो बहुत ज्यादा. पीढ़ी जिसमे मैं भी शामिल हूँ. किसी आयोजन कि बजाय यह भी हो सकता है कि इस साल के बचे हुवे महीनों को इन साहित्यकारों के नाम समर्पित कर दें. संकल्प करें कि इस वर्ष कम से कम एक-एक कृति इन साहित्यकारों कि पढेंगे.
जरुरत इस बात कि है कि हमारी पीढ़ी में पढने कि ललक पैदा हो. जो पढ़ रहें हैं उन्हें चाहिए कि अपना पढ़ा बांटें. इस से प्रेरणा मिलेगी. अंतरजाल कि दुनिया में अब कुछ भी असंभव नहीं है.
जिन खोजा तिन पाईयां, गहरे पानी पैठ.

1 comment:

  1. yaqinan hame roshani ki taraf bhad na chahiye

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